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3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा होगा रक्षा बजट, यहां खर्च होगी ये रकम

सर्जिकल स्ट्राइक और पाकिस्तान से तनातनी के बीच इस बार रक्षा बजट में ज्यादा बढ़ोत्तरी होने की संभावना है। रक्षा मंत्रालय की मांग को यदि सरकार स्वीकार कर लेती है तो यह बढ़ोत्तरी तीस फीसद तक हो सकती है। वैसे, अनुमान यह है कि वित्त मंत्रालय इसमें थोड़ी कटौती करके 20-22 फीसदी तक की बढ़ोत्तरी को मंजूरी दे सकता है।

रक्षा बजट को लेकर वित्त मंत्री अरुण जेटली पूर्व में बयान दे चुके हैं कि इसमें बढ़ोत्तरी की जाएगी। दूसरे, सैन्य बलों के आधुनिकीकरण और रक्षा सौदों के भुगतान आदि के चलते भी इस बार ज्यादा बजट की दरकार है। सरकार की तरफ से तीनों सेनाओं को अगले 15 सालों की चुनौतियों के मद्देनजर योजना बनाने को कहा गया है। इसलिए बलों को इन तैयारियों के लिए ज्यादा बजट की दरकार है।

तीन लाख करोड़ से अधिक
रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार हालांकि तीस फीसदी की बढ़ोत्तरी का सुझाव दिया गया है। लेकिन इस बात पर निर्भर करता है कि वित्त मंत्रालय कितना उपलब्ध करा पाता है। फिर भी यह उम्मीद है कि रक्षा बजट तीन लाख करोड़ रुपये से ज्यादा होगा। जबकि चालू वित्त वर्ष के दौरान यह 2.58 लाख करोड़ है। रक्षा से जुड़े करीब 83 सौदे इस साल स्वीकृत हुए हैं। सौदों का भुगतान हिस्सों में होता है इसलिए एक बड़ी राशि इन सौदों की अगले वित्त वर्ष में चुकानी होगी।

सेना की नई कमान
चीन की चुनौतियों से निपटने के लिए सेना की माउंटेन कमान बनाने का कार्य चल रहा है। हालांकि इसके लिए अलग से बजट अब तक नहीं मिला है। लेकिन माउंटेन कमान का गठन का कार्य चल रहा है। फिर संभावना है कि इस बार अलग से बजट इस मद में मिल सकता है। खबर है कि सेना के नए प्रमुख साइबर और स्पेस कमान जैसे परियोजनाओं को मूर्त रूप देना चाहते हैं जो लंबे समय से लंबित चली आ रही हैं। लेकिन इसके लिए भी बजट का अलग से आवंटन होगा।

आधुनिकीकरण बजट
पिछले बजट में तीनों सेनाओं को आधुनिकीकरण के लिए 78 हजार करोड़ रुपये का बजट दिया गया था। लेकिन तब इसे कम बताया गया था। मंत्रालय चाहता है कि इसके लिए ज्यादा बजट मिले क्योंकि वायुसेना को दो सौ नए विमानों की जरूरत है। राफेल का भुगतान अभी बाकी है। नौसेना के कई पोत निर्माण की प्रक्रिया में हैं तथा कई अधिग्रहण विदेशों से होने हैं। इसलिए इस मद में एक लाख करोड़ रुपये तक के आवंटन की उम्मीद है। पिछली बार आधुनिकीकरण के बजट में महज चार हजार करोड़ की बढ़ोत्तरी हुई थी।

पेंशनरों के लिए चाहिए बड़ी राशि
जब हम सेना के बजट की बात करते हैं तो इसमें पेंशन का जिक्र नहीं होता है। पेंशनरों के लिए पिछले साल 82 हजार करोड़ आवंटित हुए थे। जो रक्षा बजट के अलावा होता है। पिछले साल वन रेंक वन पेंशन योजना लागू हुई। यह राशि इस साल भी बढ़ेगी क्योंकि अभी वन रेंक वन पेंशन की विसंगतियों पर समिति की रिपोर्ट लागू होनी है। पेंशनरों को सातवें वेतन आयोग का फायदा देने से भी राशि में इजाफा हो रहा है।

रक्षा खर्च 20 फीसदी के पार होगा
चालू वर्ष के बजट को देखें तो कुल बजट का करीब 17 फीसदी देश रक्षा पर खर्च करता है। चालू वर्ष के दौरान कुल बजट का आकार 19.78 करोड़ का था। जिसका 17 फीसदी रक्षा पर व्यय हुआ। लेकिन इस बार बढ़ोत्तरी से यह 20 फीसदी से ज्यादा होगा। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च स्टडीज की रिपोर्ट के अनुसार भारत अपनी जीडीपी का 2.5 फीसदी बजट रक्षा पर खर्च करता है। हालांकि जीडीपी के हिसाब से चीन का व्यय महज 2.1 फीसदी है। लेकिन चीन की जीडीपी का आकार बढ़ा होने के कारण उसका वास्तविक व्यय ज्यादा है।

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