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महिला डाकुओं के नाम से कांपता था चंबल का बीहड़

चंबल के बीहड़ों का नाम आते ही लोगों के जेहन में डाकूओं के नाम आने लगते हैं. चंबल में कई ऐसे डाकु हुए जिनके नाम से पुलिस भी कांप जाती थी. लेकिन ऐसी महिलाओं की भी कमी नहीं, जिन्होंने बीहड़ों पर पुरुष डकैतों की तरह ही राज किया. हत्या, लूट, डकैती और अपहरण के मामलों में भी वे महिला डाकू पीछे नहीं रहीं. ऐसी ही पांच कुख्यात दस्यु सुंदरियों के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं.डाकू फूलन देवी को बीहड़ में कुख्यात डकैत माना जाता है. जिसे वक्त और हालात ने डाकू बनने पर मजबूर कर दिया था. उसके साथ सामूहिक बलात्कार हुआ था. जिसके बाद वह महज 16 साल की उम्र में डाकू बन गई थी. उसने बलात्कार का बदला लेने के लिए राजपूत समाज के 22 लोगों को सरेआम कत्ल कर दिया था. बाद में वर्ष 1983 में फूलन देवी ने सरेंडर कर दिया था. करीब साल बाद जब वह जेल से छूटी तो उसने राजनीति का रुख कर लिया. सपा के टिकट पर उसने मिर्जापुर से दो बार लोकसभा चुनाव लड़ा और वह सांसद रही. मगर वर्ष 2001 में फूलन देवी की दिल्ली में उनके सरकारी आवास के बाहर गोली मारकर हत्‍या कर दी गई थी.उन दिनों बीहड़ में डाकू लाला राम और डाकू कुसुमा नाइन का राज था. उनके नाम से लोग थर्राते थे. उसी दौरान इन दोनों 13 साल की एक लड़की को अगवा कर लिया था. उस लड़की का नाम था सीमा परिहार. बीहड़ में रहने के दौरान सीमा को डकैतों ने की जीवन शैली इतनी पसंद आई कि उसने भी डाकू बनने की ठान ली. जवानी की दहलीज तक पहुंचते पहुंचते सीमा परिहार का नाम चंबल में आतंक बन गया था. उसके सिर पर लगभग 6 दर्जन लोगों की हत्‍या का आरोप था. जबकि उसके नाम अपहरण के दो सौ से ज्यादा मामले थे. वर्ष 2000 में सीमा ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया था. इसके बाद कुछ साल पहले वह चर्चित टीवी शो बिग बॉस में भी दिखाई दी थी.पुतली बाई को चंबल की पहली महिला डाकू माना जाता है. उसका असली नाम गौहरबानो था. उसके साथ हुई जुल्म ज्यादती ने उसे हथियार उठाने पर मजबूर कर दिया था. चंबल के बीहड़ो पर कभी उसका राज चलता था. उसका नाम आज भी चंबल के बीहडों में बहादुर और उसूलपसंद डाकू के रूप में लिया जाता है. उसका जन्म एक बेहद गरीब परिवार में हुआ था. बाद में वो एक नाचने वाली बन गई. उसी के बाद उसका नाम गौहरबानो से पुतलीबाई हो गया था. एक बार मशहूर डाकू सुल्ताना ने एक जगह उसे नाचते हुए देखा और तभी से वो उसे नाचने के लिए बुलाने लगा. धीरे-धीरे डाकू सुल्ताना पुतलीबाई को अपना दिल दे बैठा और उसके बाद वह डाकू सुल्ताना के साथ वहीं बीहड़ों में रहने लगी थी. सुल्ताना की मौत के बाद पुतलीबाई गिरोह की सरदार बन गई थी. पचास के दशक में उसका खूब आतंक था.कुसमा नाइन बीहड़ का जाना माना नाम था. उसे बेरहमी के लिए जाना जाता था. माना जाता है कि कानपुर देहात के बेहमई कांड का बदला लेने के लिए वह डाकू बन गई थी. दरअसल, उस कांड में डाकू फूलन देवी ने 22 राजपूतों की सामूहिक हत्या की थी. जिसके चलते कुसमा ने बाद में 14 मल्लाहों को मौत नींद की सुला दिया था. कुसमा को चंबल की कुख्यात दस्यु सुंदरी माना जाता था. उसने संतोष और राजबहादुर नामक दो मल्लाहों की आंखें निकाल कर बेरहमी की नई इबारत लिख दी थी.दस्यु सुंदरी रेणु यादव नाम यूपी के विधानसभा चुनाव से पहले सुर्खियों में आया था. वह राजनीति में आना चाहती थी, लिहाजा उसने अखिलेश यादव से कई बार मुलाकात की थी. चंबल के बीहड़ में वो डाकू चंदन यादव के साथ रही थी. उसके खिलाफ हत्या, अपहरण और डकैती के कई मामले दर्ज थे. रेणु का जन्म का औरैया जिले के जमालीपुर गांव में हुआ था. 29 नवम्बर, 2003 को चाकू चंदन यादव के गिरोह ने उसे अगवा कर लिया था. अपहरण के वक्त वह स्कूल जा रही थी. उसका परिवार उसे तलाशता रहा. पुलिस से गुहार लगाता रहा लेकिन पुलिस ने कुछ नहीं किया था. बाद में डाकुओं ने उसके घरवालों से फिरौती मांगी थी. मगर उसका परिवार पैसा नहीं दे पाया था. बस तभी से वो उस गैंग में ही पली बढ़ी. बाद में उसने इटावा में आत्म समर्पण कर दिया था.

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