जन-धन खाते बने सरकार के गले की फांस
मोदी सरकार के लिठअब जन-धन खाते गले की फांस बनते जा रहे हैं। दरअसल लाख कोशिशों के बाद à¤à¥€ जन-धन में जीरो बैलेंस अकाऊंट यानी जिन खातों में बिलà¥à¤•à¥à¤² à¤à¥€ पैसा नहीं है उनकी संखà¥à¤¯à¤¾ बढ़ रही है। वितà¥à¤¤ मंतà¥à¤°à¤¾à¤²à¤¯ के सूतà¥à¤°à¥‹à¤‚ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° नोटबंदी लागू होने के बाद इन अकाऊंटà¥à¤¸ में अचानक पैसे जमा हà¥à¤ थे। अब फिर से तेजी के साथ जीरो बैलेंस अकाऊंट की संखà¥à¤¯à¤¾ बढ़ी है। यानी जमा पैसे निकाल लिठगà¤à¥¤ आंकड़ों की बात करें तो अकà¥à¤¤à¥‚बर में जहां जन-धन सà¥à¤•ीम में कà¥à¤² जीरो बैलेंस अकाऊंटà¥à¤¸ की संखà¥à¤¯à¤¾ 5.93 करोड़ थी वहीं फरवरी तक यह संखà¥à¤¯à¤¾ बढ़कर 6.90 करोड़ हो गई। मामले की गंà¤à¥€à¤°à¤¤à¤¾ को देखते हà¥à¤ वितà¥à¤¤ मंतà¥à¤°à¤¾à¤²à¤¯ में बैठकों का दौर आरंठहो चà¥à¤•ा है। सरकार जलà¥à¤¦ अब बैंकों के साथ बैठक करने जा रही है। जलà¥à¤¦ ही इसका समाधान ढूंढा जाà¤à¤—ा। बैंकों ने अब साफ तौर से सरकार को कह दिया है कि वे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ समय तक जीरो बैलेंस वाले अकाऊंट का à¤à¤¾à¤° वहन नहीं कर सकते। बेहतर है कि इन खातों को बंद कर दिया जाà¤à¥¤ वितà¥à¤¤ मंतà¥à¤°à¤¾à¤²à¤¯ के आंकड़ों के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° 14 जून तक देश में 28.9 करोड़ पà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ जन-धन खाते थे। इनमें से 23.27 करोड़ बैंक खाते सरकारी बैंकों में, 4.7 करोड़ खाते रीजनल रूरल बैंकों में और 92.7 लाख खाते पà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤µà¥‡à¤Ÿ बैंकों में थे। इन खातों में संयà¥à¤•à¥à¤¤ रूप से 64,564 करोड़ रà¥à¤ªà¤ जमा थे। सरकारी बैंकों में 50,800 करोड़ रà¥à¤ªà¤, रीजनल रूरल बैंकों में 11,683.42 करोड़ रà¥à¤ªà¤ और पà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤µà¥‡à¤Ÿ बैंकों में 2080.62 करोड़ रà¥à¤ªà¤ जमा हà¥à¤à¥¤à¤¬à¥ˆà¤‚कों के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° जन-धन सà¥à¤•ीम के तहत à¤à¤• अकाऊंट को जारी रखने पर 140 रà¥à¤ªà¤ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ का खरà¥à¤š आता है। à¤à¤¸à¥‡ में अगर 7 करोड़ अकाऊंट में जीरो बैलेंस रहेगा तो यह राशि करोड़ों में चली जाà¤à¤—ी। सरकार ने बैंकों से कहा है कि वे जन-धन अकाऊंट में पैसे जमा करवाने के लिठजागरूकता अà¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤¨ चलाà¤à¤‚। जागरूकता अà¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤¨ चलाया à¤à¥€ गया मगर इससे कोई फायदा नहीं हà¥à¤†à¥¤ à¤à¤• सरकारी बैंक के उचà¥à¤šà¤¾à¤§à¤¿à¤•ारी का कहना है कि इस वकà¥à¤¤ बैंकिंग सैकà¥à¤Ÿà¤° की जो दशा है उसके तहत जीरो बैलेंस वाले खातों को बंद करने का विकलà¥à¤ª ही सबसे बेहतर है। बैंकों पर इस वकà¥à¤¤ à¤à¤¨.पी.à¤. को कम करने का दबाव है। à¤à¤¸à¥‡ में जीरो बैलेंस वाले खातों से जो वितà¥à¤¤à¥€à¤¯ बोठबैंकों पर पड़ रहा है उसको बैंक किस तरह से उठा सकते हैं। à¤à¤• विकलà¥à¤ª यह है कि जीरो बैलेंस वाले खातों का खरà¥à¤šà¤¾ सरकार बैंकों को अलग से दे।