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एक सार्थक अभियान के साथ जुड़ता जन-जन : मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र

सोमवार की शाम मैं सीहोर जिले के जैत गाँव में पहुंचा। अवसर था नर्मदा यात्रा के दौरान नर्मदा तट पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने का। ग्राम में जनता में काफी उत्साह दिखा। करीब तीन किलोमीटर की पदयात्रा में मुख्यमंत्री चौहान के साथ यह उत्साह दिखाई दिया। आसपास के ग्रामों की बालिकाएं और महिलाएं सिर पर कलश रखे चल रहीं थीं। इनके उत्साहवर्धन के लिए नमामि देवि नर्मदे-सेवा यात्रा के कार्यकर्ता गुलाब की पंखुडिय़ों से उनका स्वागत कर रहे थे। मेरे साथ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान, संगठन महामंत्री सुहास भगत और बहुत से और जनप्रतिनिधि भी इसमें शामिल हुए। हम सभी ने जनता के बीच किसी यात्रा के असल आनंद का अनुभव किया। जैत गाँव के नर्मदा घाट पर की गई विद्युत सजावट उज्जैन के कुंभ मेले की याद दिला रही थी।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर सौ दिन पूरे कर चुकी नर्मदा के शुद्धिकरण और संरक्षण की नर्मदा सेवा यात्रा को अपार जन-समर्थन मिल रहा है। इसमें सभी धर्म और समुदाय के लोग आगे बढक़र भाग ले रहे हैं और नर्मदा मैया के संरक्षण के साथ ही शुद्धिकरण के लिए अपना योगदान दे रहे हैं। यात्रा एक जन आंदोलन के रूप में उभर कर आ रही है। यात्रा में साधु-संत, मौलवी-मौलाना सहित खेल और फिल्म जगत अलावा सामाजिक क्षेत्र की महान हस्तियों ने सहयोग देने की बात कही है। इन वर्गों ने यात्रा में शामिल होकर ऐसा सहयोग दिया भी है। हम जानते ही हैं कि मुख्यमंत्री चौहान ने नर्मदा सेवा यात्रा का शुभारम्भ नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक से 11 दिसम्बर 2016 को शुरू किया था। तकरीबन साढ़े तीन हजार किलोमीटर की यात्रा 11 मई 2017 को अमरकंटक में सम्पन्न होगी। 
मुझे यह जानकर सुखद आश्चर्य हुआ कि केन्द्रीय प्रदूषण निवारण मंडल के अनुसार नर्मदा नदी देश की सबसे कम प्रदूषित नदी की श्रेणी में आती है। नदी को प्रदूषण से मुक्त कर संरक्षित करने की बड़ी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री चौहान ने अपने कंधों पर ली है।
इस अनूठी यात्रा का मुख्य उद्देश्य नर्मदा के संरक्षण और उससे जुड़े संसाधनों के सतत उपयोग के संबंध में जागरूकता बढ़ाना, नदी के तटों से लगे क्षेत्रों के संरक्षण और भूमि कटाव को रोकने के लिए नर्मदा तटों पर वृक्षारोपण करना, जैविक खेती को बढ़ावा देना और नदी को प्रदूषित करने वाले स्रोतों की पहचान कर जनजागरूकता तथा जनसहभागिता से उन्हें रोकना है। अभियान के अंतर्गत नशा मुक्ति, स्वच्छता एवं पर्यावण के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है। लोग जागरूक हो भी रहे हैं।
ऐसा विश्वास व्यक्त किया गया है कि जनजागृति से नदियों के संरक्षण का दायित्व बोध भी बढ़ेगा। नदियों में गंदगी प्रवाहित न करने की शपथ लेकर उसे कार्य रूप में लागू करके सुख-समृद्धि की एक नई शुरूआत होगी। नर्मदा मैया की कृपा भी जनता को प्राप्त होगी। शुद्ध मन से नर्मदा सेवा यात्रा में हिस्सेदारी करने वाले आने वाली पीढिय़ों के लिए एक अच्छा समाज बनाने और उसे संवारने का कार्य कर रहे हैं। यात्रा के प्रति आम लोगों का रूझान बढ़ता ही जा रहा है।

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