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दलजीत सिंह पहले भी बना चुके हैं खराब पिच, खतरे में है पद

बीसीसीआई के मुख्य क्यूरेटर के रूप में अनुभवी पिच क्यूरेटर दलजीत सिंह का पद समीक्षा के दायरे में आ गया है क्योंकि आईसीसी ने कड़ी रिपोर्ट देते हुए उनके मार्गदर्शन में पुणे में बनी पिच को 'खराब' करार दिया है. भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पुणे में खेला गया पहला टेस्ट तीन दिन के अंदर खत्म हो गया था जिसमें मेजबान टीम को शिकस्त का सामना करना पड़ा.
पहले भी बना चुके हैं खराब पिच
भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच नवंबर 2015 में हुए तीसरे नागपुर टेस्ट की पिच को भी आईसीसी मैच रैफरी जैफ क्रो ने 'खराब' करार दिया था और वह पिच भी दलजीत के मार्गदर्शन में तैयार की गई थी. वह टेस्ट भी तीन दिन में खत्म हुआ था और मेजबान टीम ने जीत दर्ज की थी. आईसीसी के एक और कारण बताओ नोटिस पर निश्चित तौर पर प्रशासकों की समिति गौर करेगी और बीसीसीआई के सीईओ राहुल जौहरी को 14 दिन के भीतर इस नोटिस का जवाब देना होगा.
खतरे में है दिलजीत का पद
बीसीसीआई के एक शीर्ष सूत्र ने कहा, "यहां तक कि अगर टीम प्रबंधन के निर्देश भी थे तो भी दलजीत इसकी अनदेखी कर सकते थे. अगर क्यूरेटर झुकना नहीं चाहता तो कोई उसे दबाव में नहीं डाल सकता. लेकिन दलजीत का टीम प्रबंधन की मांग के आगे झुकने का इतिहास रहा है और वह लगातार मनमाफिक विकेट देते रहे हैं. बात सिर्फ इतनी है कि नागपुर और पुणे के विकेट उनके सहज रहने के लिए काफी खराब थे. सीओए इस मामले को देख सकती है." दलजीत का पद निश्चित तौर पर खतरे में है क्योंकि 14 महीने में यह आईसीसी की दूसरी खराब रेटिंग है.
टीम प्रबंधन और बीसीसीआई की ओर से कोई लिखित निर्देश नहीं दिया गया था और ऐसे में सारी जिम्मेदारी दलजीत पर आ जाती है जो पहले ही 79 बरस के हैं और पद पर इसलिए बरकरार रहे हैं क्योंकि लोढा समिति की सिफारिशों में चयनकर्ताओं (60 साल) या प्रशासकों (70 साल) की आयु सीमा की तरह क्यूरेटर के लिए कोई आयु सीमा तय नहीं की गई है.

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