पूरा प्रदेश पानी -पानी -नदी नाले उफान पर
मानसून द्रोणिका मध्य प्रदेश से होकर गुजर रही है। इसके साथ ही अलग-अलग स्थानों पर तीन मौसम प्रणालियां भी बनी हुई हैं। इस कारण लगातार प्रदेश में बारिश हो रही है। मंगलवार को भोपाल समेत 25 जिलों में बारिश हुई। बालाघाट में सबसे ज्यादा पौने 2 इंच बारिश हुई। सीधी में सवा इंच, श्योपुर-सिवनी में 1 इंच, बैतूल, शिवपुरी-मंडला में पौन इंच और पचमढ़ी, छिंदवाड़ा-नरसिंहपुर में आधा इंच पानी गिरा।मंगलवार को दतिया,ग्वालियर गुना, नर्मदापुरम, छतरपुर, रायसेन, जबलपुर, रीवा, टीकमगढ़, उमरिया, मऊगंज, शाजापुर, आगर-मालवा, देवास, सीहोर समेत कई जिलों में बारिश का दौर जारी रहा। प्रदेश का सबसे ऊंचा झरना बहुती जलप्रपात में पानी आ गया है। ये झरना मऊगंज जिले में है। इसकी ऊंचाई 198 मीटर है। यहां पर्यटक भी पहुंचने लगे हैं। लगातार बारिश से विजयपुर में क्वारी नदी उफान पर है। इससे निचली बस्तियों में पानी भरने का खतरा है।मौसम विभाग की सीनियर वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि इस बार जून में कोटे से ज्यादा पानी गिरा है। ऐसी ही बारिश जुलाई में भी होने की उम्मीद है। अगले 4 दिन पूरे प्रदेश में तेज बारिश का दौर रहेगा, जिससे जुलाई में भी कोटे से ज्यादा बारिश हो सकती है। उन्होने बताया कि प्रदेश की सामान्य बारिश 37.3 इंच है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जिले की सामान्य बारिश 38 से 39 इंच तक है। पिछले साल प्रदेश में 44 इंच से ज्यादा पानी गिरा था।मौसम विभाग की सीनियर वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि गुजरात के सौराष्ट्र-कच्छ में एक लो प्रेशर एरिया (कम दबाव का क्षेत्र) एक्टिव हो गया है। जिसका असर अगले 1-2 दिन में एमपी में भी देखने को मिलेगा। वहीं, प्रदेश में अभी टर्फ की एक्टिविटी बनी हुई है। यह टर्फ जिन हिस्सों से गुजर रही है, वहां भारी बारिश का अलर्ट है। साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम भी सक्रिय है। इन सभी वजहों से मध्यप्रदेश तरबतर हो रहा है।