रेत से भरे ट्रैक्टर पकड़े, लेकिन चंबल का सीना चीरने वाले फाइटरों पर नहीं हो रही कार्रवाई
मंदसौर जिले में खनिज विभाग की कार्रवाई लंबे समय से सवालों के घेरे में है। आंकड़ों का खेल कागजों में पूरा करने के लिए मछलियों का शिकार और मगरमच्छों को माफी की तर्ज पर कार्रवाई की जा रही है। सोशल मीडिया पर खनिज विभाग की पोल खुल रही है। अवैध खनन के वीडियो वायरल हो रहे हैं। इधर, रेत से भरे ट्रैक्टरों को खनिज विभाग पकड़ रहा है। लेकिन यह नदी में फाइटर मशीनों से चंबल का सीना चीरने वालों तक पहुंचने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा। संजीत में यह फिर से देखने को मिला। संजीत में रेत से भरे चार ट्रैक्टर पकड़े, लेकिन संजीत स्थित कचहरी पाइंट पर खुलेआम हो रहे मशीनों से अवैध खनन तक पहुंचने की हिम्मत विभाग के अधिकारी नहीं जुटा पाए।
मंदसौर से गुजरने वाली चंबल, जिसे बीते लंबे समय से मालवा की गंगा का दर्जा देने की मांग उठ रही है, उसकी लहरों पर अब रेत माफिया का राज है। चंबल की लहरों से लेकर किनारे पर रेत माफियाओं ने अभेद किले बनाए हुए हैं, जिससे दिन-रात रेत का अवैध खनन अत्याधुनिक ढंग से किया जा रहा है। नाव में लगे इंजन, जनरेटर के साथ नदी में पाइप डालकर रेत मशीनों से खींच रहे हैं। रेत भी नदी में ही स्टॉक करने के बाद फिर बाजार में बेच रहे हैं। खाना बनाने से लेकर पूरा घर-संसार भी इन माफियाओं ने नाव में ही बना रखा है। गांधीसागर का बैंक वाटर जो जिले के संजीव क्षेत्र में आता है, यहां कचहरी पाहट सहित आसपास क्षेत्रों में चंचल के पानी पर नाव में लगी मशीनों और बड़े पाइप डालकर रेत निकाली जा रही है।नाहरगढ़ थाना क्षेत्र में स्थित इस इलाके से रेत निकाली जा रही है। चंबल का यह किनारा मंदसौर जिले में आता है। यहां दिन-रात नदी में बड़ी नाव, पनडुब्बी के जरिए रेत निकालने का काम माफिया कर रहे हैं। नदी के गर्भ से पानी के बीच से रेत पाइप से आती है और नाव में जमा होती है। नाव भी इतनी बड़ी की इसमें करीब 10-15 ट्रॉलों तक रेत जमा हो जाती है। इसके बाद इसे किनारे पर लाकर गाड़ियों में भरकर बेचने के लिए भेजा जाता है।यह नीमच जिले के मनासा क्षेत्र के कुंडला खामखेही में आता है। यहा जेसीबी से नाव से रेत निकालकर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर परिवहन किया जा रहा है। नाव में ही डीजल पाइप चलने के साथ खाना बनाने के लिए गैस सिलेंडर सहित अन्य संसाधन भी जमा रहते हैं। नीमच-मंदसौर के साथ ही कई जिलों में यहां से रेत का परिवहन कर उसे बेचकर लाखों की अवैध कमाई की जा रही हैं।चंबल नदी में नाव के बीच जुगाड़ से मशीनों का इस्तमाल कर रेत खींचने का काम लंबे समय से चल रहा है। मंदसौर के संजीत क्षेत्र की सीमा में नाव चलाकर रेत निकाली जा रही है। जो नाव में जमा कर रहे हैं। इसके बाद अत्यधिक धीमी रफ्तार से रेत को लेकर यह नाव नीमच जिले की सीमा में जाकर रेत स्टॉक कर रही है। आम लोगों को रेत की ट्रॉली 5 से 6 हजार रुपये में बाजार में मिल रही है। रेत से मोटी कमाई भले ही रेत माफियाओं का यह गिरोह कर रहा है, लेकिन शासन को इससे हर दिन राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है।गांधीसागर में फाइटर मशीनों से अवैध रेती निकालने पर पूर्व कलेक्टर ओपी श्रीवास्तव तथा तत्कालीन एसपी तथा रतलाम रेंज डीआईजी मनोज सिंह ने पांच फाइटर मशीनें अरनिया जटिया पारली के यहां से जब्त की थी। वहीं, पूर्व कलेक्टर मनोज पुष्प के कार्यकाल में भी फाइटर जब्त करने की कार्रवाई हुई थी। उसके बाद आज तक फाइटर मशीने जब्त नहीं की गई।