क्या था दिल्ली शराब घोटाला, जिसमें गिरफ्तार हुए थे केजरीवाल; सीबीआई की जांच ईडी से अलग कैसे?
दिल्ली आबकारी नीति मामले में गिरफ्तार मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सशर्त जमानत दे दी है। जून के अंत में केजरीवाल को केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) ने गिरफ्तार किया था। उस वक्त जांच सीबीआई ने अदालत को बताया था कि वह जांच के लगभग निष्कर्ष पर पहुंच चुके हैं। वहीं, अदालत ने भी कहा कि आरोपी से मामले में पूछताछ करने के लिए रिमांड जरूरी है।इससे पहले केजरीवाल को 21 मार्च को कथित शराब नीति घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने गिरफ्तार किया था। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अभी जेल में बंद हैं लेकिन अब वह बाहर आ जाएंगे।
पहले जानते हैं आखिर क्या है शराब नीति घोटाला?
कोरोना काल के बीच दिल्ली सरकार ने 'दिल्ली आबकारी नीति 2021-22' लागू की थी। इस शराब नीति के कार्यान्वयन में कथित अनियमितता की शिकायतें आईं जिसके बाद उपराज्यपाल ने सीबीआई जांच की सिफारिश की। इसके साथ ही दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 सवालों के घेरे में आ गई। हालांकि, नई शराब नीति को बाद में इसे बनाने और इसके कार्यान्वयन में अनियमितताओं के आरोपों के बीच रद्द कर दिया गया।
जांच कैसी शुरू हुई?
सीबीआई ने अगस्त 2022 में इस मामले में 15 आरोपियों के खिलाफ नियमों के कथित उल्लंघन और नई शराब नीति में प्रक्रियागत गड़बड़ी के आरोप में एफआईआर दर्ज की। बाद में सीबीआई द्वारा दर्ज मामले के संबंध में ईडी ने पीएमएलए के तहत मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले की जांच शुरू कर दी।
सीबीआई की जांच ईडी की जांच से कैसे अलग है?
ईडी और सीबीआई दिल्ली सरकार की नई शराब नीति में कथित घोटाले की अलग-अलग जांच कर रही हैं। ईडी नीति को बनाने और लागू करने में धन शोधन के आरोपों की जांच कर रही है। वहीं, सीबीआई की जांच नीति बनाते समय हुई कथित अनियमितताओं पर केंद्रित है।
ईडी और सीबीआई दिल्ली सरकार की नई शराब नीति में कथित घोटाले की अलग-अलग जांच कर रही हैं। ईडी नीति को बनाने और लागू करने में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच कर रही है। वहीं, सीबीआई की जांच नीति बनाते समय हुईं कथित अनियमितताओं पर केंद्रित है।
सीबीआई की जांच में अब तक क्या-क्या हुआ?
दिल्ली शराब नीति अनियमितता मामले की जांच कर रही सीबीआई साऊथ ग्रुप समेत कुल 17 आरोपियों के खिलाफ चार आरोप-पत्र दायर कर चुकी है। जिनके खिलाफ आरोप पत्र दायर किए गए हैं उनमें मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की बेटी के. कविता भी शामिल हैं। इसके अलावा साऊथ ग्रुप समेत कई आरोपी भी हैं।
जांच एजेंसियों ने अदालत में दावा किया कि दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 आप के शीर्ष नेताओं द्वारा बनाई गई थी, ताकि लगातार अवैध धन कमा कर और उसे अपने पास लाया जा सके। दावा है कि यह नीति अवैध और आपराधिक गतिविधियों को सुविधाजनक बनाने के लिए जानबूझकर कमियों के साथ बनाई गई थी।
इस नीति की वजह से पिछले दरवाजे से गुटबंदी को बढ़ावा मिला। इसके साथ ही नीति में 12% का अत्यधिक थोक लाभ मार्जिन और 185% का भारी खुदरा लाभ मार्जिन दिया गया। ऐसा करने से AAP के शीर्ष नेताओं को व्यवसायियों से भारी रिश्वत मिली।
केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी ने हाल ही में अदालत को बताया कि केजरीवाल कथित घोटाले के सरगना हैं। एजेंसी के मुताबिक, केजरीवाल ने 'साउथ ग्रुप' से 100 करोड़ रुपये की मांग की थी। वहीं इस पैसे का एक हिस्सा करीब 45 करोड़ रुपये का इस्तेमाल आप ने 2022 में हुए गोवा विधानसभा के चुनाव में किया था।