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क्यों ब्राह्मण होने के बावजूद जयललिता को दफनाया गया ?..ये हो सकते हैं कारण..

नई दिल्ली.तमिलनाडु की दिवंगत सीएम जयललिता का मंगलवार को अंतिम संस्कार किया गया। इन सबके बीच सबसे खास बात रही कि उनके पार्थिव शरीर काे दाह संस्कार करने की बजाय दफनाया गया। आपको बता दें कि जयललिता आयंगर ब्राह्मण थीं। ऐसे में इसे लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
 
- हालांकि, पहले यह साफ नहीं था कि जयललिता का दाह संस्कार होगा या उन्हें दफनाया जाएगा।
- जयललिता द्रविड़ मूवमेंट से जुड़ी थी। इस आंदोलन का मूल मकसद ब्राह्मणवादी परंपराओं का विरोध करना था।
- यही कारण है कि द्रविड़ आंदोलन से जुड़े ज्यादातर नेता अपने नाम के साथ टाइटल का इस्तेमाल नहीं करते। क्योंकि वे टाइटल काे जातिसूचक मानते हैं।
 
राजनीतिक गुरू एमजीआर को भी दफनाया गया था
 
- एक दूसरे अनुमान के मुताबिक जयललिता के राजनीतिक गुरू एमजी रामचंद्रन को भी दफनाया गया था।
- धर्म या जाति का प्रतिनिधित्व नहीं करने की अपने बड़े नेताओं की सोच के चलते AIADMK में पहले भी ऐसा हुआ है।
- द्रविड़ मूमेंट के बड़े नेता और डीएमके अन्नादुरै को भी दफनाया गया था। अन्नादुरै तमिलनाडु के पहले द्रविड़ सीएम थे। एमजीआर भी पहले डीएमके में ही थे, जो बाद में अलग हो गए थे।
 
नहीं था कोई रिश्तेदार
 
- मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जयललिता का कोई रिश्तेदार नहीं था। हिंदू धर्म के मुताबिक मुखाग्नि देने वाले का मृतक के साथ खून का रिश्ता होना चाहिए।
- इसमें ज्यादातर बेटा, भाई, पिता या भाई मुखाग्नि देता है। जया का इनमें से कोई नहीं था। जया ने कभी शादी नहीं की और उन्होंने अपने भाई से भी कई साल पहले रिश्ते तोड़ दिए थे।
- उनके अंतिम संस्कार में रिश्तेदारों में केवल उनकी भतीजी शामिल थी। पंडित जो थोड़ी बहुत रस्म करते दिखे, उसमें उनकी नजदीकी साथी शशिकला ही शामिल नजर आईं।

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