हाथों में तलवार लिà¤, घोड़ी चà¥à¥€ दà¥à¤²à¥à¤¹à¤¨, दिया बेटी बचाने का संदेश
बामनिया, à¤à¤¾à¤¬à¥à¥à¥à¤† । नगर में शà¥à¤•à¥à¤°à¤µà¤¾à¤° रात को जब à¤à¤• दà¥à¤²à¥à¤¹à¤¨ घोड़ी पर सवार होकर गाजे-बाजे के साथ निकली तो हर शखà¥à¤¸ उसे हैरानी से देखता रहा। यà¥à¤µà¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ à¤à¥€ अपनी धà¥à¤¨ में नाच रही थी। साथ में महिलाà¤à¤‚ à¤à¥€ बराती बनकर चल रही थीं।
बामनिया निवासी सà¥à¤°à¥‡à¤‚दà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤‚ह देवड़ा की पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ कà¥à¤‚वर कविता की शादी नीमच के निलेश कà¥à¤‚वर से तय हà¥à¤ˆà¥¤ शà¥à¤•à¥à¤°à¤µà¤¾à¤° रात दà¥à¤²à¥à¤¹à¤¨ की बरात निकली। गांव की गलियों से ये बरात निकली। जिस किसी ने देखा, वो अचरज से à¤à¤° गया। कà¥à¤µà¤° सविता हाथ में तलवार लिठपूरे आतà¥à¤®à¤µà¤¿à¤¶à¥à¤µà¤¾à¤¸ के साथ निकली। उसकी इस इचà¥à¤›à¤¾ का परिवार वालों ने à¤à¥€ पूरा समà¥à¤®à¤¾à¤¨ किया। जिले में इस तरह दà¥à¤²à¥à¤¹à¤¨ के घोड़ी पर बैठकर बारात निकालने का ये पहला मामला है। वो उस जगह तक गई, जहां बारात ठहरी थी। वहां दà¥à¤²à¥à¤¹à¥‡ को नà¥à¤¯à¥Œà¤¤à¤¾ देकर वो फिर इसी तरह लौट आई।कविता कà¥à¤‚वर ने कहा कि बेटा और बेटियों में किसी तरह का à¤à¥‡à¤¦ नहीं है। बेटों के बराबर ही बेटियां हैं। à¤à¤¸à¥‡ में परिवार वालों ने जब इसके बारे में बताया तो मैंने à¤à¥€ हां कर दी। हर समाज को इस तरह की पहल करनी चाहिठताकि बेटियां हर कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में आगे रहे। मैं इसलिठघोड़ी पर बैठकर निकली हूं कि लड़के तो हमेशा ही घोड़ी पर सवार होकर दà¥à¤²à¥à¤¹à¤¨ को लेने आते है, लेकिन में अपने दà¥à¤²à¥à¤¹à¥‡ को शादी नà¥à¤¯à¥Œà¤¤à¤¾ देने खà¥à¤¦ निकली। इससे मैं बेटी बचाने का संदेश देना चाहती हूं। बेटे-बेटियों में कोई अंतर नहीं किया जाठआज की बेटिया à¤à¥€ किसी से कम नहीं है।