शतà¥à¤°à¥à¤¬à¤¾à¤§à¤¾ से सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾à¤•वच पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करने वाली देवी हैं मां बगलामà¥à¤–ी
माता अपने à¤à¤•à¥à¤¤à¥‹à¤‚ के जीवन की आवशà¥à¤¯à¤•ताओं का सदा खà¥à¤¯à¤¾à¤² रखती है। उसके सà¥à¤–-दà¥à¤– में हर कदम पर साथ देती है। ताकि उसके à¤à¤•à¥à¤¤ किसी परेशानी में न पड़ें। मां के à¤à¤•à¥à¤¤à¥‹à¤‚ को कà¤à¥€ शतà¥à¤°à¥ परेशान नहीं करते हैं, लेकिन इसके बावजूद यदि शतà¥à¤°à¥à¤¬à¤¾à¤§à¤¾ उसके à¤à¤•à¥à¤¤ पर आती है तो मां उसको अà¤à¤¯ होने का वरदान पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करती है।
मां के कई सà¥à¤µà¤°à¥‚प है जो à¤à¤¶à¥à¤µà¤°à¥à¤¯ के वरदान से लेकर सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ का कवच तक पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करते हैं। मधà¥à¤¯à¤ªà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ में मालवा की à¤à¥‚मि पर à¤à¤• à¤à¤¸à¤¾ ही देवी मंदिर है मां बगलामà¥à¤–ी का, जहां दरà¥à¤¶à¤¨à¤®à¤¾à¤¤à¥à¤° से सà¥à¤–-समृदà¥à¤§à¥€ के आशीरà¥à¤µà¤¾à¤¦ के साथ शतà¥à¤°à¥à¤¬à¤¾à¤§à¤¾ का निवारण होता है। बगलामà¥à¤–ी माता का मंदिर आगर जिले के नलखेड़ा में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ है।पृथà¥à¤µà¥€à¤²à¥‹à¤• में माता बगलामà¥à¤–ी तीन सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ पर विराजमान है, जो दतिया (मधà¥à¤¯à¤ªà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶), कांगड़ा (हिमाचल) तथा नलखेड़ा (मधà¥à¤¯à¤ªà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶) में हैं। नलखेड़ा में तीन मà¥à¤–ों वाली तà¥à¤°à¤¿à¤¶à¤•à¥à¤¤à¤¿ माता बगलामà¥à¤–ी का मंदिर लखà¥à¤‚दर नदी के किनारे सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ है। à¤à¤¸à¥€ मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ है कि मधà¥à¤¯ में मां बगलामà¥à¤–ी, दाà¤à¤‚ मां महालकà¥à¤·à¥à¤®à¥€ और बाà¤à¤‚ मां सरसà¥à¤µà¤¤à¥€ विराजमान हैं।मां बगलामà¥à¤–ी का तà¥à¤°à¤¿à¤¶à¤•à¥à¤¤à¤¿ सà¥à¤µà¤°à¥‚प में मंदिर à¤à¤¾à¤°à¤¤ में और कहीं नहीं है। दà¥à¤µà¤¾à¤ªà¤° यà¥à¤—ीन यह मंदिर अतà¥à¤¯à¤‚त चमतà¥à¤•ारिक है। यहां देश à¤à¤° से शैव और शाकà¥à¤¤ मारà¥à¤—ी साधà¥-संत और à¤à¤•à¥à¤¤à¤—ण तांतà¥à¤°à¤¿à¤• अनà¥à¤·à¥à¤ ान के लिठआते रहते हैं। आमजन à¤à¥€ अपनी मनोकामना पूरी करने या किसी à¤à¥€ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में विजय पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करने के लिठयजà¥à¤ž-हवन और पूजा-पाठकरवाते हैं। कहा जाता है कि मां à¤à¤—वती बगलामà¥à¤–ी का यह मंदिर बीच शà¥à¤®à¤¶à¤¾à¤¨ में बना हà¥à¤† है।
शासà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में वरà¥à¤£à¤¿à¤¤ दसमहाविदà¥à¤¯à¤¾à¤“ं में माता बगलामà¥à¤–ी आठवीं महाविदà¥à¤¯à¤¾ हैं। इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ माता पीतामà¥à¤¬à¤°à¤¾ à¤à¥€ कहते हैं। ये सà¥à¤¤à¤®à¥à¤à¤¨ की देवी हैं। शतà¥à¤°à¥à¤¨à¤¾à¤¶, वाकसिदà¥à¤§à¤¿, वाद विवाद में विजय के लिठइनकी उपासना की जाती है। इनकी उपासना से शतà¥à¤°à¥à¤“ं का सà¥à¤¤à¤®à¥à¤à¤¨ होता है यानी शतà¥à¤°à¥ कितना ही पà¥à¤°à¤¬à¤² कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ न हो वह पराजित होता है, तथा जातक का जीवन निषà¥à¤•ंटक हो जाता है।

मां बगलामà¥à¤–ी की चमतà¥à¤•ारी और सिदà¥à¤§ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤®à¤¾ की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ का कोई à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ नहीं मिलता है। जनशà¥à¤°à¥à¤¤à¤¿ है की यह मूरà¥à¤¤à¤¿ सà¥à¤µà¤¯à¤‚सिदà¥à¤˜ सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ है। काल गणना के हिसाब से यह सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ करीब पांच हजार साल से à¤à¥€ पहले से सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ है। कहा जाता है की महाà¤à¤¾à¤°à¤¤ काल में पांडव जब विपतà¥à¤¤à¤¿ में थे तब à¤à¤—वान शà¥à¤°à¥€ कृषà¥à¤£ ने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ मां बगलामà¥à¤–ी के इस सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ की उपासना करने के लिठकहा था। उस समय समà¥à¤°à¤¾à¤Ÿ यà¥à¤§à¤¿à¤·à¥à¤ िर ने लकà¥à¤·à¥à¤®à¤£à¤¾ नदी, जो अब लखà¥à¤‚दर नदी कहलाती है के किनारे पर बैठकर मां बगलामà¥à¤–ी की आराधना की थी और कौरवों पर विजय पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ की थी।

माता पीतवरà¥à¤£à¥€ है इसलिठमाता को पीली चीजों को समरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ किया जाता है। पीले वसà¥à¤¤à¥à¤°, पीले फूल, पीले मिषà¥à¤ ानà¥à¤¨ आदि। इस मंदिर परिसर में माता बगलामà¥à¤–ी के अतिरिकà¥à¤¤ माता लकà¥à¤·à¥à¤®à¥€, कृषà¥à¤£, हनà¥à¤®à¤¾à¤¨, à¤à¥ˆà¤°à¤µ तथा सरसà¥à¤µà¤¤à¥€ à¤à¥€ विराजमान हैं। मां बगलामà¥à¤–ी के इस परिसर में बिलà¥à¤µ पतà¥à¤°, चंपा, सफेद आंकड़ा, आंवला, नीम à¤à¤µà¤‚ पीपल के वृकà¥à¤· à¤à¤• साथ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ हैं।