मां जà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¾ देवी जी की जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿ के करें दरà¥à¤¶à¤¨
आज चैतà¥à¤° नवरातà¥à¤°à¤¿ का दूसरा दिन है, इस दिन नवदà¥à¤°à¥à¤—ा के दूसरे रूप बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤šà¤¾à¤°à¤¿à¤£à¥€ की उपासना किठजाने का विधान है। पंजाब केसरी की टीम आपको लाइव दरà¥à¤¶à¤¨ करवाने जा रही है 51 शकà¥à¤¤à¤¿à¤ªà¥€à¤ ों में से à¤à¤• जà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¾ देवी धाम के, यह धà¥à¤®à¤¾ देवी का सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ है। यहां à¤à¤—वती सती की जीठगिरी थी। मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ है कि à¤à¤—वान शिव यहां उनà¥à¤®à¤¤ à¤à¥ˆà¤°à¤µ के रूप में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ है। यहां देवी के दरà¥à¤¶à¤¨ जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿ रूप में किठजाते हैं। परà¥à¤µà¤¤ की चटà¥à¤Ÿà¤¾à¤¨ से नौ विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ पर बिना किसी ईंधन के जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿ सà¥à¤µà¤¤ ही जलती रहती है। यही कारण है कि यहां देवी को जà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¾ देवी के नाम से जाना जाता है। मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ है कि सà¤à¥€ शकà¥à¤¤à¤¿à¤ªà¥€à¤ ों में देवी मां हमेशा निवास करती हैं। शकà¥à¤¤à¤¿à¤ªà¥€à¤ में माता की आराधना करने से माता जलà¥à¤¦à¥€ पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ होती है।
मंदिर रà¥à¤¨à¤¿à¤®à¤¾à¤£
सतयà¥à¤— में समà¥à¤°à¤¾à¤Ÿ à¤à¥‚मिचनà¥à¤¦à¥à¤° ने यह अनà¥à¤®à¤¾à¤¨ लगाया था कि देवी सती की जीठहिमालय की धौलाधार पहाड़ियों पर गिरी होगी। उस सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पर खूब खोज की गई मगर सफलता नहीं मिली। तदउपरांत उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने नगरकोट कांगड़ा में à¤à¤• छोटा सा मंदिर बनवा दिया। कà¥à¤› सालों के पशà¥à¤šà¤¾à¤¤ à¤à¤• गà¥à¤µà¤¾à¤²à¥‡ ने समà¥à¤°à¤¾à¤Ÿ à¤à¥‚मिचनà¥à¤¦à¥à¤° को यह सूचना दी की उसने धौलाधार पहाड़ियों में à¤à¤• जà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¾ निकली हà¥à¤ˆ देखी है जो निरंतर जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿ के रूप में जल रही है। समà¥à¤°à¤¾à¤Ÿ ने सà¥à¤µà¤¯à¤‚ जाकर वहां दरà¥à¤¶à¤¨ किठऔर घोर वन में मंदिर का रà¥à¤¨à¤¿à¤®à¤¾à¤£ à¤à¥€ करवाया।
मंदिर में पूजा हेतू शाकदà¥à¤µà¥€à¤ª से दो à¤à¥‹à¤œà¤• बà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥à¤®à¤£à¥‹à¤‚ को बà¥à¤²à¤¾à¤•र नियà¥à¤•à¥à¤¤ किया गया। तब से लेकर आज तक उनà¥à¤¹à¥€à¤‚ दोंनो à¤à¥‹à¤œà¤• बà¥à¤°à¤¾à¤¹à¥à¤®à¤£à¥‹à¤‚ के वंशज जà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¾à¤®à¥à¤–ी तीरà¥à¤¥ की पूजा करते आ रहे हैं। माता के इस मंदिर की महिमा à¤à¤¸à¥€ है कि यहां आकर नासà¥à¤¤à¤¿à¤• à¤à¥€ आसà¥à¤¤à¤¿à¤• हो जाते हैं। यह सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ हिमाचल पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ के कांगड़ा जिले में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ है। पंजाब के होशियारपà¥à¤° से गौरीपà¥à¤°à¤¾ डेरा नामक सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ से होते हà¥à¤ जà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¾ जी पहà¥à¤‚चा जा सकता है। डेरा से जà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¾ जी का मंदिर 20 कि मी की दूरी पर है।
मंदिर में देवी के दरà¥à¤¶à¤¨ नौ जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के रूप में होते हैं। ये जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ सà¥à¤µà¤ªà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ से ही धीरे तेज जलती रहती है। मà¥à¤–à¥à¤¯ जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿ चांदी के आले में जलती रहती है। नौ जà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¾à¤“ं में पà¥à¤°à¤®à¥à¤– जà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¾ जो चांदी के आले के बीच सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ है उसे महाकाली कहते हैं। अनà¥à¤¯ आठजà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¾à¤“ं के रूप में मां अनà¥à¤¨à¤ªà¥‚रà¥à¤£à¤¾, चणà¥à¤¡à¥€, हिंगलाज, विधà¥à¤¯à¤µà¤¾à¤¸à¤¿à¤¨à¥€, महालकà¥à¤·à¥à¤®à¥€, सरसà¥à¤µà¤¤à¥€, अमà¥à¤¬à¤¿à¤•ा à¤à¤µà¤‚ अंजी देवी जà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¾ देवी मंदिर में निवास करती हैं।
यहां पर मà¥à¤–à¥à¤¯ दरà¥à¤¶à¤¨à¤¿à¤¯ सà¥à¤¥à¤² हैं सेजा à¤à¤µà¤¨, टेढ़ा मंदिर, अमà¥à¤¬à¤¿à¤•ेशà¥à¤µà¤° महादेव, सिदà¥à¤§à¤¨à¤¾à¤—ारà¥à¤œà¥à¤¨à¥¤ मà¥à¤–à¥à¤¯ दरà¥à¤¶à¤¨à¤¿à¤¯ सà¥à¤¥à¤²à¥‹à¤‚ के अलावा मंदिर परिसर व उसके पास ही अनà¥à¤¯ दरà¥à¤¶à¤¨à¤¿à¤¯ सà¥à¤¥à¤² à¤à¥€ हैं। जिनका महतà¥à¤µ सरà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¤¿à¤¤ है।