दिवाली पूजा: ये है सबसे शà¥à¤ मà¥à¤¹à¥‚रà¥à¤¤
कारà¥à¤¤à¤¿à¤• अमावसà¥à¤¯à¤¾ की काली रात में दीपोतà¥à¤¸à¤µ का परà¥à¤µ हर घर में मनाया जाता है। दीपों की रोशनी में अंधेरी रात चांदनी रात की आà¤à¤¾ देती है। कहते हैं दिवाली के दिन-रात बहà¥à¤¤ खास होते हैं कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि लकà¥à¤·à¥à¤®à¥€ को घर बà¥à¤²à¤¾à¤¨à¥‡ के लिठविशेष पूजन किठजाते हैं। कà¥à¤› मà¥à¤¹à¥‚रà¥à¤¤ मां लकà¥à¤·à¥à¤®à¥€ को घर बà¥à¤²à¤¾à¤¨à¥‡ के लिठसबसे शà¥à¤ होते हैं। शासà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में कहा गया है महालकà¥à¤·à¥à¤®à¥€ का पूजन पà¥à¤°à¤¦à¥‹à¤· काल में करने से वो बहà¥à¤¤ पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ होती हैं और अपनी कृपा बनाठरखती हैं। जब दिन और रात का मिलन होता है, उस घड़ी के संयोग को पà¥à¤°à¤¦à¥‹à¤· काल कहते हैं।
पà¥à¤°à¤¦à¥‹à¤· काल- सायं 5:43 से 8:16
लकà¥à¤·à¥à¤®à¥€ पूजा का शà¥à¤ मà¥à¤¹à¥‚रà¥à¤¤- सायं 7:11 से 8:16
सायं 7:11 से वृषठकाल का आरंठहोगा, जो रात 9:06 बजे तक रहेगा।
इसके अतिरिकà¥à¤¤ महानिशिता काल में à¤à¥€ लकà¥à¤·à¥à¤®à¥€ पूजन किया जा सकता है। जिसका मà¥à¤¹à¥‚रà¥à¤¤ केवल 51 मिनट तक रहेगा।
महानिशिता काल मà¥à¤¹à¥‚रà¥à¤¤- रात 11: 40 से 12:31 तक रहेगा।
इसके अतिरिकà¥à¤¤ चार चौघड़िया पूजन मà¥à¤¹à¥‚रà¥à¤¤ à¤à¥€ रहेंगे
पà¥à¤°à¤¾à¤¤: (शà¥à¤) मà¥à¤¹à¥‚रà¥à¤¤ - 6:28 से 7:52 तक
पà¥à¤°à¤¾à¤¤: (चर, लाà¤, अमृत) मà¥à¤¹à¥‚रà¥à¤¤- 10:41 से मधà¥à¤¯à¤¾à¤¹à¥à¤¨ 2:54 तक
संधà¥à¤¯à¤¾ का (अमृत, चर) मà¥à¤¹à¥‚रà¥à¤¤- 4:19 से 8:54 तक
रातà¥à¤°à¤¿ का (लाà¤) मà¥à¤¹à¥‚रà¥à¤¤- 12:06 से 12:41 तक