नवरातà¥à¤°: शेरावाली मां के पास कैसे आठअसà¥à¤¤à¥à¤°-शसà¥à¤¤à¥à¤°, जानें और à¤à¥€ रहसà¥à¤¯
जिस काम को और कोई समà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ नहीं करता, उसे सरà¥à¤µà¤¶à¤•à¥à¤¤à¤¿ समà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ देवी दà¥à¤°à¥à¤—ा कर सकती हैं। शकà¥à¤¤à¤¿ की अधिषà¥à¤ ातà¥à¤°à¥€ देवी की संरचना तमाम देवी-देवताओं की संचित शकà¥à¤¤à¤¿ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ हà¥à¤ˆ है। जिस तरह तमाम नदियों के संचित जल से समà¥à¤¦à¥à¤° बनता है उसी तरह à¤à¤—वती दà¥à¤°à¥à¤—ा विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ देवी-देवताओं के शकà¥à¤¤à¤¿ समरà¥à¤¥à¤¨ से महान बनी हैं। इस आदà¥à¤¯à¤¾à¤¶à¤•à¥à¤¤à¤¿ को शिव ने तà¥à¤°à¤¿à¤¶à¥‚ल, विषà¥à¤£à¥ ने चकà¥à¤°, वरà¥à¤£ ने शंख, अगà¥à¤°à¤¿ ने शकà¥à¤¤à¤¿, वायॠने धनà¥à¤·-बाण, इंदà¥à¤° ने वजà¥à¤° और यमराज ने गदा देकर अजेय बनाया। दूसरे देवताओं ने मां दà¥à¤°à¥à¤—ा को उपहार सà¥à¤µà¤°à¥‚प हार चूड़ामणि, कà¥à¤‚डल, कंगन, नà¥à¤ªà¥‚र, कंठहार आदि तमाम आà¤à¥‚षण दिà¤à¥¤ हिमालय ने विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ रतà¥à¤¨ और वाहन के रूप में सिंह à¤à¥‡à¤‚ट किया।
शंख : दà¥à¤°à¥à¤—ा मां के हाथ में शंख पà¥à¤°à¤£à¤µ का या रहसà¥à¤¯à¤µà¤¾à¤¦à¥€ शबà¥à¤¦ ‘ओम’ का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• है जो सà¥à¤µà¤¯à¤‚ à¤à¤—वान को उनके हाथों में धà¥à¤µà¤¨à¤¿ के रूप में होने का संकेत करता है।
धनà¥à¤·-बाण : धनà¥à¤£-बाण ऊरà¥à¤œà¤¾ का पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¤¿à¤¤à¥à¤µ करते हैं। दà¥à¤°à¥à¤—ा मां के à¤à¤• ही हाथ में इन दोनों का होना इस बात का संकेत है कि मां ने ऊरà¥à¤œà¤¾ के सà¤à¥€ पहलà¥à¤“ं à¤à¤µà¤‚ गतिज कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ पर नियंतà¥à¤°à¤£ पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ किया हà¥à¤† है।
बिजली और वजà¥à¤° : ये दोनों दृढ़ता के पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• हैं और दà¥à¤°à¥à¤—ा मां के à¤à¤•à¥à¤¤à¥‹à¤‚ को à¤à¥€ वजà¥à¤° की à¤à¤¾à¤‚ति दृढ़ होना चाहिà¤à¥¤ जैसे बिजली और वजà¥à¤° जिस à¤à¥€ वसà¥à¤¤à¥ को छूती है उसे ही नषà¥à¤Ÿ à¤à¤µà¤‚ धà¥à¤µà¤¸à¥à¤¤ कर देती है, अपने को बिना कà¥à¤·à¤¤à¤¿ पहà¥à¤‚चाà¤à¥¤ इसी तरह माता के à¤à¤•à¥à¤¤à¥‹à¤‚ को à¤à¥€ अपने पर विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ करके किसी à¤à¥€ कठिन से कठिन कारà¥à¤¯ को खà¥à¤¦ को कà¥à¤·à¤¤à¤¿ पहà¥à¤‚चाठबिना करना चाहिà¤à¥¤
कमल के फूल : माता के हाथ में जो कमल का फूल है वह पूरà¥à¤£ रूप से खिला हà¥à¤† नहीं है, इसका तातà¥à¤ªà¤°à¥à¤¯ है कि कमल सफलता का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• तो है परनà¥à¤¤à¥ सफलता निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ नहीं है। कमल को संसà¥à¤•ृत में ‘पंकज’ कहा जाता है। अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤ कीचड़ से या उसमें पैदा होने वाला। इस पà¥à¤°à¤•ार लोà¤, वासना और लालच के इस संसार में कीचड़ के बीच à¤à¤•à¥à¤¤à¥‹à¤‚ की आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• गà¥à¤£à¤µà¤¤à¥à¤¤à¤¾ के सततॠविकास के लिठखड़ा है कमल।
सà¥à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ चकà¥à¤° : सà¥à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ चकà¥à¤° जो दà¥à¤°à¥à¤—ा मां की तरà¥à¤œà¤¨à¥€ के चारों ओर घूम रहा है। बिना उनकी उंगली को छà¥à¤ हà¥à¤ यह पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• है इस बात का कि पूरा संसार मां दà¥à¤°à¥à¤—ा की इचà¥à¤›à¤¾ के अधीन है और उनà¥à¤¹à¥€à¤‚ के आदेशों पर चल रहा है। माता इस तरह के अमोघ असà¥à¤¤à¥à¤°-शसà¥à¤¤à¥à¤° इसलिठपà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— करती हैं ताकि दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ से अधरà¥à¤®, बà¥à¤°à¤¾à¤ˆ और दà¥à¤·à¥à¤Ÿà¥‹à¤‚ का नाश हो सके और सà¤à¥€ समान रूप से खà¥à¤¶à¤¹à¤¾à¤²à¥€ से जी सकें।
तलवार : तलवार जो दà¥à¤°à¥à¤—ा मां ने अपने हाथों में पकड़ी हà¥à¤ˆ है वह जà¥à¤žà¤¾à¤¨ की पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• है। वह जà¥à¤žà¤¾à¤¨ जो तलवार की धार की तरह तेज à¤à¤µà¤‚ पूरà¥à¤£ हो। वह जà¥à¤žà¤¾à¤¨ जो सà¤à¥€ शंकाओं से मà¥à¤•à¥à¤¤ हो, तलवार की चमक का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• माना जाता है।
तà¥à¤°à¤¿à¤¶à¥‚ल : मां दà¥à¤°à¥à¤—ा का तà¥à¤°à¤¿à¤¶à¥‚ल अपने आप में तीन गà¥à¤£ समाठहà¥à¤ हैं। यह सतà¥à¤µ, रजस à¤à¤µà¤‚ तमस गà¥à¤£à¥‹à¤‚ का पà¥à¤°à¤¤à¥€à¤• है और वह अपने तà¥à¤°à¤¿à¤¶à¥‚ल से तीनों दà¥à¤–ों का निवारण करती हैं। चाहे वह शारीरिक हो, चाहे मानसिक हो या फिर चाहे आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• हो।
देवी मां दà¥à¤°à¥à¤—ा शेर पर à¤à¤• निडर मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ में बैठी हैं, जिसे अà¤à¤¯à¤®à¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ कहा जाता है। जो संकेत है डर से सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤°à¤¤à¤¾ का। जगत की मां दà¥à¤°à¥à¤—ा अपने सà¤à¥€ à¤à¤•à¥à¤¤à¥‹à¤‚ को बस इतना ही कहती हैं, अपने सà¤à¥€ अचà¥à¤›à¥‡-बà¥à¤°à¥‡ कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ à¤à¤µà¤‚ करà¥à¤¤à¤µà¥à¤¯ को मà¥à¤ पर छोड़ दो और मà¥à¤•à¥à¤¤ हो जाओ अपने डर से अपने à¤à¤¯ से।