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गौरक्षा के नाम पर हो रही हिंसा से नाखुश है भागवत

जयपुर। à¤ªà¥à¤°à¤§à¤¾à¤¨à¤®à¤‚त्री नरेन्द्र मोदी के बाद अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संघचालक डॉ. मोहन भागवत ने भी गौरक्षा के नाम पर हो रही हिंसा पर नाखुशी जाहिर की है। जयपुर प्रवास पर आए भागवत ने  à¤¯à¤¹à¤¾à¤‚ चल रहे अभ्यास वर्ग में कहा है कि जो लोग गाय के प्रति आस्था रखते हैं, वे गाय का पालन करते हैं। उनकी बहुत गहरी आस्था को चोट लगने के बावजूद वे हिंसा का मार्ग नहीं अपनाते हैं।

जयपुर के केशव विद्यापीठ में चल रहे संघ के खण्ड कार्यवाह अभ्यास वर्ग में एक स्वयंसेवक ने इस बारे में सवाल पूछा था। इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि गौ का संवर्धन हो, क्योंकि गाय हमारे लिए आर्थिक रूप से भी लाभकारी है, लेकिन इसके नाम पर हिंसा उचित नहीं है। गौमता पर आस्था रखने वाले हिंसा का मार्ग नहीं अपनाते। चीनी सामान के बहिष्कार व स्वदेशी के संबंध में भागवत ने कहा कि अपने आसपास जो भी गृह उद्योग, कुटीर उद्योग, लघु उद्योग से वस्तुएं बनती हैं, उनको उपयोग में लाना यह स्वदेशी का मूल मंत्र है।

भागवत ने कहा कि स्वदेशी से देश के बेराजगारों को रोजगार मिलता है। स्वदेशी केवल वस्तुओं तक नहीं अपितु मन में स्वदेश के गौरव का भाव प्रकट होना चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वाभिमान को आर्थिक दृष्टि से भी स्वावलंबी होना आवश्यक है।

भागवत ने कहा कि राष्ट्र को आर्थिक दृष्टि से स्वावलम्बी करने का अर्थ स्वदेशी वस्तुओं तक सीमित नहीं है। स्वदेशी का भाव अपने जीवन में भारतीयता के आचरण से प्रकट हो। संघ प्रमुख मोहन भागवत छह दिन के प्रवास पर जयपुर आए हुए हैं।

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