गडà¥à¤¢à¥‡ खोद रही हैं IAS की पतà¥à¤¨à¥€, वजह जानकार हो जाà¤à¤‚गे हैरान
बिहार का सीतामà¥à¥€ जिला बाॠकी चपेट में है. यहां लोगों की सà¥à¤§ लेने न कोई नेता पहà¥à¤‚च पा रहा है और न ही कोई आला अधिकारी. लेकिन यहां के लोगों की फिकà¥à¤° à¤à¤• महिला को इस कदर है कि वो कà¤à¥€ हाथों में फावड़ा लेकर पानी निकालने खà¥à¤¦ गडà¥à¤¢à¥‡ खोदती है तो कà¤à¥€ नंगे पैर कीचड़ से सने रासà¥à¤¤à¥‹à¤‚ पर जाकर लोगों को खाना खिलाती है. लेकिन जब कोई इस महिला का बैकगà¥à¤°à¤¾à¤‰à¤‚ड जानता है तो सà¥à¤¨à¤•र हैरान रह जाता है.दरअसल, बाॠसे परेशान लोगों के बीच यह कोई आम महिला नहीं बलà¥à¤•ि आईà¤à¤à¤¸ अफसर अमित जयसवाल की पतà¥à¤¨à¥€ रितॠहैं. जो दिन रात बाढ़ पीड़ितों के बीच रहकर उनकी सेवा कर रही हैं. बता दें कि रितू सीतामà¥à¥€ जिले की पंचायत सिंहवाहिनी की मà¥à¤–िया हैं.सरकारी वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤“ं से परेशान होकर रितॠने अपने फेसबà¥à¤• पेज पर लिखा कि सिंहवाहिनी बाॠकी चपेट में है. सड़क मारà¥à¤— से संपरà¥à¤• टूट चà¥à¤•ा है. सरकार से हमने कई बार मदद मांगी, लेकिन केवल आशà¥à¤µà¤¾à¤¸à¤¨ मिला. रितॠबाॠपीड़ितों की परेशानियों को लेकर लगातार फेसबà¥à¤• पर पोसà¥à¤Ÿ डाल रही हैं.रितॠकी शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ पà¥à¤¾à¤ˆ वैशाली जिले के सेंट पॉल सà¥à¤•ूल से हà¥à¤ˆ. इसके बाद उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने वैशाली महिला कॉलेज से बीठइन इकोनॉमिकà¥à¤¸ किया. उनकी ऑफिशियल वेबसाइट के मà¥à¤¤à¤¾à¤¬à¤¿à¤•, शादी के बाद जब कई सालों बाद वे अपने पैतृक गांव नरकटिया पहà¥à¤‚ची तो वहां के हालात देख बेहद दà¥à¤–ी हà¥à¤ˆ. जिसके बाद उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपनी आलीशान ज़िनà¥à¤¦à¤—ी को छोड़ लोगों की मदद करने का फैसला किया.इसके बाद वे सिंहवाहिनी आई और कà¥à¤› लड़कियों को पà¥à¤¾à¤¨à¤¾ शà¥à¤°à¥‚ किया. इसका नतीजा यह हà¥à¤† कि 2015 में नरकटिया गांव की 12 लड़कियां पहली बार मैटà¥à¤°à¤¿à¤• की परीकà¥à¤·à¤¾ में पास हà¥à¤ˆ. फिर 2016 में सिंहवाहिनी पंचायत से मà¥à¤–िया पद के लिठरितॠचà¥à¤¨à¤¾à¤µ लड़ी और 32 उमà¥à¤®à¥€à¤¦à¤µà¤¾à¤°à¥‹à¤‚ को हराते हà¥à¤ चà¥à¤¨à¤¾à¤µ जीतीं.1996 में अरà¥à¤£ कà¥à¤®à¤¾à¤° से रितॠकी शादी हà¥à¤ˆ. अरà¥à¤£ 1995 बैच के आईà¤à¤à¤¸ अफसर हैं. बता दें कि रितॠको उचà¥à¤š शिकà¥à¤·à¤¿à¤¤ मà¥à¤–िया का अवॉरà¥à¤¡ à¤à¥€ मिल चà¥à¤•ा है. साथ ही उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ पंचायत के विकास के लिठà¤à¥€ कई अवॉरà¥à¤¡ मिले.