नकà¥à¤·à¤¤à¥à¤° à¤à¤• साथ न मिलने से इस बार 3 दिन मनेगी शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ जनà¥à¤®à¤¾à¤·à¥à¤Ÿà¤®à¥€
वाराणसी। बहà¥à¤¤ वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ बाद à¤à¤¸à¤¾ हो रहा है कि इस बार अषà¥à¤Ÿà¤®à¥€ तिथि व रोहिणी नकà¥à¤·à¤¤à¥à¤° à¤à¤• साथ नहीं मिलने से जनà¥à¤®à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤µ की धूम तीन दिनों तक रहेगी। गृहसà¥à¤¥à¤œà¤¨ (सà¥à¤®à¤¾à¤°à¥à¤¤) à¤à¤—वान शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ जनà¥à¤®à¤¾à¤·à¥à¤Ÿà¤®à¥€ 14 अगसà¥à¤¤ को मनाà¤à¤‚गे।
खà¥à¤¯à¤¾à¤¤ जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤·à¤¾à¤šà¤¾à¤°à¥à¤¯ पं. ऋषि दà¥à¤µà¤¿à¤µà¥‡à¤¦à¥€ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° अषà¥à¤Ÿà¤®à¥€ तिथि 14 अगसà¥à¤¤ को शाम 5.40 बजे लग रही है जो 15 अगसà¥à¤¤ को दिन में 3.26 बजे तक रहेगी। जनà¥à¤®à¤¾à¤·à¥à¤Ÿà¤®à¥€ वà¥à¤°à¤¤ का पारन 15 अगसà¥à¤¤ को होगा।
मथà¥à¤°à¤¾-वृंदावन में गोकà¥à¤²à¤¾à¤·à¥à¤Ÿà¤®à¥€ (उदय काल में अषà¥à¤Ÿà¤®à¥€) 15 अगसà¥à¤¤ को मनाई जाà¤à¤—ी। उदयवà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¿à¤¨à¥€ रोहिणी मतावलंबी वैषà¥à¤£à¤µà¤œà¤¨ शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ जनà¥à¤® वà¥à¤°à¤¤ 16 अगसà¥à¤¤ को करेंगे।
रोहिणी नकà¥à¤·à¤¤à¥à¤° 15-16 अगसà¥à¤¤ की रात 1.27 बजे लग रहा है जो 16 को रात 11.50 बजे तक रहेगा।
सनातन धरà¥à¤® में à¤à¤¾à¤¦à¥à¤° कृषà¥à¤£ अषà¥à¤Ÿà¤®à¥€ की शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ जनà¥à¤®à¤¾à¤·à¥à¤Ÿà¤®à¥€ वà¥à¤°à¤¤ परà¥à¤µ के रूप में मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ है। इस दिन à¤à¤—वान शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ का जनà¥à¤®à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤µ मनाया जाता है।
à¤à¤—वान के दशावतारों में सरà¥à¤µà¤ªà¥à¤°à¤®à¥à¤– पूरà¥à¤£à¤¾à¤µà¤¤à¤¾à¤° सोलह कलाओं से परिपूरà¥à¤£ à¤à¤—वान शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ को माना जाता है जो दà¥à¤µà¤¾à¤ªà¤° के अंत में हà¥à¤†à¥¤
पà¥à¤°à¤à¥ का जनà¥à¤® à¤à¤¾à¤¦à¥à¤°à¤ªà¤¦ कृषà¥à¤£ अषà¥à¤Ÿà¤®à¥€ बà¥à¤§à¤µà¤¾à¤° की अरà¥à¤¦à¥à¤§à¤°à¤¾à¤¤à¥à¤°à¤¿ रोहिणी नकà¥à¤·à¤¤à¥à¤° व वृष राशि के चंदà¥à¤°à¤®à¤¾ में हà¥à¤† था।
पूजन विधान आचारà¥à¤¯ दà¥à¤µà¤¿à¤µà¥‡à¤¦à¥€ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° यह सरà¥à¤µà¤®à¤¾à¤¨à¥à¤¯ व पापघà¥à¤¨ वà¥à¤°à¤¤ बाल, कà¥à¤®à¤¾à¤°, यà¥à¤µà¤¾, वृदà¥à¤§ सà¤à¥€ अवसà¥à¤¥à¤¾ वाले नर-नारियों को करना चाहिà¤à¥¤ इससे पापों की निवृतà¥à¤¤à¤¿ व सà¥à¤–ादिकी वृदà¥à¤§à¤¿ होती है।
वà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को उपवास की पूरà¥à¤µ रातà¥à¤°à¤¿ में अलà¥à¤ªà¤¾à¤¹à¤¾à¤°à¥€ व जितेंदà¥à¤°à¤¿à¤¯ रहना चाहिà¤à¥¤ तिथि विशेष पर पà¥à¤°à¤¾à¤¤à¤ƒ सà¥à¤¨à¤¾à¤¨à¤¾à¤¦à¤¿ कर सूरà¥à¤¯, सोम (चंदà¥à¤°à¤®à¤¾), पवन, दिगà¥à¤ªà¤¤à¤¿ (चार दिशाà¤à¤‚), à¤à¥‚मि, आकाश, यम और बà¥à¤°à¤¹à¥à¤®à¤¾ आदि को नमन कर उतà¥à¤¤à¤° मà¥à¤– बैठना चाहिà¤à¥¤
हाथ में जल-अकà¥à¤·à¤¤-कà¥à¤¶ लेकर मास-तिथि-पकà¥à¤· का उचà¥à¤šà¤¾à¤°à¤£ कर 'मेरे सà¤à¥€ तरह के पापों का शमन व सà¤à¥€ अà¤à¤¿à¤·à¥à¤Ÿà¥‹à¤‚ की सिदà¥à¤§à¤¿ के लिठशà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ जनà¥à¤®à¤¾à¤·à¥à¤Ÿà¤®à¥€ वà¥à¤°à¤¤ करेंगे' का संकलà¥à¤ª लेना चाहिà¤à¥¤
उतà¥à¤¸à¤µ-अनà¥à¤·à¥à¤ ान दोपहर में काले तिल के जल से सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ कर माता देवकी के लिठसूतिका गृह नियत कर उसे सà¥à¤µà¤šà¥à¤› व सà¥à¤¶à¥‹à¤à¤¿à¤¤ करते हà¥à¤ सूतिकापयोगी सामगà¥à¤°à¥€ यथाकà¥à¤°à¤® रखना चाहिà¤à¥¤
सà¥à¤‚दर बिछौने पर अकà¥à¤·à¤¤à¤¾à¤¦à¤¿ मंडल बनाकर कलश सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ और सदà¥à¤¯à¤ƒ पà¥à¤°à¤¸à¥‚त शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ की मूरà¥à¤¤à¤¿ सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ करनी चाहिà¤à¥¤ रात में पà¥à¤°à¤à¥à¤œà¤¨à¥à¤® के बाद जागरण व à¤à¤œà¤¨ का विधान है।
इस वà¥à¤°à¤¤-उतà¥à¤¸à¤µ को करने से पà¥à¤¤à¥à¤° की इचà¥à¤›à¤¾ रखने वाली महिला को पà¥à¤¤à¥à¤°, धन की कामना वालों को धन, यहां तक कि कà¥à¤› à¤à¥€ पाना असंà¤à¤µ नहीं रहता। अंत में शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ के धाम वैकà¥à¤‚ठकी पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤à¤¿ होती है।